गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र ने 2012 में 20 मार्च को विश्व खुशहाली दिवस घोषित किया था।

संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक विश्व खुशहाली रिपोर्ट में देशों को इस आधार पर रैंक करती है कि उसके नागरिक खुश को कितना खुश महसूस करते हैं।

रिपोर्ट तैयार करने के लिए प्रति व्यक्ति आय, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, सामाजिक सपोर्ट, भ्रष्टाचार आदि को शामिल किया जाता है। इसके बाद सभी देशों को हैप्पीनेस स्कोर दिया जाता है।

इस साल कोरोना वायरस महामारी की वजह से आर्थिक नुकसान और लगातार हो रही मौत की वजह से खुशहाल देशों की सूची तैयार करना काफी मुश्किल था। अधिकतर देशों के लोग कोरोना के खौफनाक प्रभाव को लेकर काफी परेशान थे।

रिपोर्ट के आधार पर इस साल अमेरिका की रैंकिंग में एक स्थान की गिरावट दर्ज की गई है। विश्व की सबसे बड़ी शक्ति एक स्थान की गिरावट के साथ 19वें स्थान पर पहुंच गई है।

बता दें कि दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक होने के बावजूद अमेरिका खुशहाली के मामले में अन्य छोटे देशों की तुलना में पीछे है।

खुशहाली के मामले में डेनमार्क दूसरे, स्विज़रलैंड तीसरे, आइसलैंड चौथे और नीदरलैंड ने पांचवां स्थान हासिल किया है।

खुशहाली के मामले में यदि भारत की बात की जाए तो इस वर्ष देश की खुशहाली में थोड़ा इजाफा हुआ है। भारत ने इस सूची में पांच स्थानों का सुधार करते हुए 139वां स्थान हासिल किया है।

गत वर्ष भारत की रैकिंग 144 थी। इसी तरह राजधानी दिल्ली दुनिया के सबसे नाखुश शहरों में शामिल है।

इस रिपोर्ट से यह साबित हो रहा है कि सरकार के लगातार प्रयासों के बाद भी देश के लोगों में पर्याप्त खुशहाली नहीं है।

खुशहाली के मामले में अन्य शक्तिशाली देश यूनाइटेड किंगडम (UK) ने 17वां स्थान हासिल किया है। इसी तरह जर्मनी 13वें, जापान 56वें और रूस 76वें स्थान पर है।

इसी तरह बेल्जियम ने खुशहाल देशों की सूची में 20वां स्थान हासिल किया है।

भारत का पड़ोसी मुल्क चीन इस साल इस सूची में 84वें स्थान पर है। नेपाल 87वें, बांग्लादेश 101, पाकिस्तान 105, म्यांमार 126 और श्रीलंका इस सूची में 129वें पायदान पर रहा है।

संयुक्त राष्ट की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के सबसे नाखुश देशों की सूची में अफगानिस्तान ने पहला स्थान हासिल किया है। इसी तरह ज़िम्बाब्वे ने दूसरा, रवांडा ने तीसरा, बोत्सवाना ने चौथा, लेसोथो ने पांचवां और मालावा ने छठा स्थान हासिल किया है।